मीरी-पीरी खालसा मार्च का लोहा नगरी मंडी गोबिंदगढ़ पहुंचने पर राजू खन्ना और खालसा के नेतृत्व में हुआ शानदार स्वागत
नशों को रोकने में पंजाब सरकार और प्रशासन पूरी तरह नाकाम: जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, राजू खन्ना
एडवोकेट धामी द्वारा संगत से बच्चों को गुरुओं के इतिहास से जोड़ने की अपील
मंडी गोबिंदगढ़, 31 अगस्त (मनोज भल्ला): तख्त श्री दमदमा साहिब, तलवंडी साबो से रवाना हुआ ‘मीरी-पीरी खालसा मार्च’ आज हल्का अमलोह की लोहा नगरी मंडी गोबिंदगढ़ पहुंचा। शहर के बत्ती चौक पर पहुंचने पर शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी के सदस्य और हल्का अमलोह के मुख्य सेवादार गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य भाई रविंदर सिंह खालसा की अगुवाई में समूची संगत, पार्टी नेताओं, युवाओं और स्त्री अकाली दल की महिलाओं द्वारा मार्च का भरपूर स्वागत किया गया। इस खालसा मार्च में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने विशेष रूप से उपस्थिति दर्ज कराई।
बड़ी संख्या में जुड़ी संगत को संबोधित करते हुए सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने सिख कौम को अपने महान विरासत से जुड़ने और सिख स्वरूप धारण करने की अपील की। पंजाब में बह रहे नशों के छठे दरिया पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि नशों को खत्म करने के दावे करने वाली मौजूदा ‘आप’ सरकार और प्रशासन इस गंभीर समस्या को रोकने में बुरी तरह विफल साबित हुए हैं। मंडी गोबिंदगढ़ शहर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दिनों के दौरान यहां पांच युवाओं का नशे की भेंट चढ़ना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि जहां सरकारें नाकाम हो रही हैं, वहां समाज को खुद एकजुट होकर नशा तस्करों के खिलाफ डटना होगा।
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने संगत के बड़े जमावड़े के लिए गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना और भाई रविंदर सिंह खालसा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि हर परिवार अपने बच्चों को गुरुओं की कुर्बानियों और सिख इतिहास से अवगत करवाए। इस मौके पर गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना और भाई रविंदर सिंह खालसा द्वारा पांच प्यारे साहिबान को सिरोपा भेंट करके सम्मान दिया गया। इसके साथ ही जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी का विशेष सम्मान किया गया। संगत ने गुरु साहिब के पवित्र शस्त्रों के दर्शन भी किए। समारोह के दौरान रागी, ढाडी, कथा वाचकों और गतका पार्टियों ने संगत को निहाल किया।
इस अवसर पर मैनेजर राजविंदर सिंह राजू, हेड ग्रंथी कुलविंदर सिंह, मैनेजर इकबाल सिंह, जिला प्रधान शरणजीत सिंह चनारथल, एसजीपीसी सदस्य अवतार सिंह रया, अमित सिंह राठी, कैप्टन जसवंत सिंह बाजवा, करमजीत सिंह भगड़ाना, बीबी किरणदीप कौर खन्ना, जोगिंदर सिंह मैनी, जतिंदर सिंह धालीवाल, जत्थेदार कुलदीप सिंह मछराई, जत्थेदार जरनैल सिंह माजरी, जत्थेदार कुलदीप सिंह मुढि़या, हरिंदर सिंह दीवा, हरबंस सिंह बडाली, भिंदर सिंह मंडी, जगजीवन सिंह उभी, जत्थेदार श्रद्धा सिंह छन्ना, बाबा निशान सिंह, फोरमैन बलवीर सिंह सिद्धू, रघबीर सिंह भांबरी, डॉ. अर्जुन सिंह अमलोह, डॉ. जसवंत सिंह, रेशम सिंह विर्क, सिमरनजीत सिंह धालीवाल, धर्मपाल सिंह, सुखविंदर सिंह काला, अमृत सिंह लंग, बहादुर सिंह हैबतपुर, रोशन सिंह मंडी, हरमिंदर सिंह मंडी, गुरसेवक सिंह तूरा, गुरदीप सिंह बब्बी, बलजिंदर सिंह सेखो, जत्थेदार नाजर सिंह, बलविंदर सिंह डडहेड़ी, कंवलजीत सिंह गिल, गुरमीत सिंह रामगढ़, राकेश कुमार शाही, गुरप्रीत सिंह चहलां, हरविंदर सिंह बिंदा, अमनदीप सिंह भद्दलथूहा, गुरकीरत सिंह पनाग, परमिंदर सिंह नीटा, जशनप्रीत सिंह शाहपुर, साहज सिंह धालीवाल, सज्जन सिंह चौबदारा, बीबी मधुमीत बडेरा, जंगवीर सिंह कुंभड़ा, जतिंदरवीर सिंह बैणा, सुखदेव सिंह अत्तली, मुकंद सिंह लुहारमाजरा, डॉ. रघबीर सिंह, सेवा सिंह तूरा, जरनैल सिंह रामगढ़, जसवंदर सिंह ग्रेवाल, गुरप्रीत सिंह भगवानपुरा, हरपाल सिंह, करम सिंह, किरणदीप सिंह, रविंदरजीत सिंह भंगू, कृष्ण कुंभड़ा, लवप्रीत सिंह बुग्गा, यादविंदर सिंह सलाणा, गुरप्रीत सिंह नोनी, हरनेक सिंह काका, रॉकी अमलोह, प्रदीप कुमार मिट्टू, गुरप्रीत सिंह मालोवाल, हरमीत सिंह खालसा, जगतार सिंह जग्गी बुग्गा, संतोख सिंह जंजुआ, राजिंदर बॉबी लल्लो, हरमन सिंह हैबतपुर, अजीत सिंह डडहेड़ी, सुरजीत सिंह बरोगा, बलजीत सिंह अंबेमाजरा, हरतेजपाल सिंह, बलजिंदर सिंह भंगू, सुखदेव सिंह बैणी, बिट्टा पटवारी, गुरप्रीत सिंह नरैणगढ़, गुरजोत सिंह, गुरदेव सिंह जस्सरा, जत्थेदार गुरबख्श सिंह बैणा, प्रिंस छत्तवाल, सुखबीर सिंह डडहेड़ी, गुरप्रीत सिंह गुरी, भगवंत सिंह गग्गी, सदीक मोहम्मद, निरभै सिंह, प्रभजोत सिंह, साहज सिंह रुड़की, टिंकू बदीनपुर, राम सिंह, करमजीत सिंह गांधी, पाल सिंह खुम्माना, हरपाल सिंह मांगो, बलजिंदर सिंह सोहल, दविंदर सिंह, जसपाल सिंह, अमृतपाल सिंह हैपी, अमरजीत सिंह अंबी, स्वर्ण सिंह बडगुज्जर, जतिंदरपाल सिंह, मनप्रीत सिंह माजरी, बहादुर सिंह, कुलविंदर सिंह काला, अमरजीत सिंह, काका सिंह झंबाला, इंदरजीत सिंह बडाली, गुरजीत सिंह लुहारमाजरा, सज्जन सिंह, केवल खां, निशान सिंह, बलतेज सिंह अमलोह, गुरिंदर सिंह सलाणा, मग्घर सिंह फोरमैन, गुरजीत सिंह बब्बू, काका सिंह मरारड़ू, गुरमेल सिंह, महिंदर सिंह कुंभ, रणधीर सिंह बडाली, कश्मीरा सिंह, जसपाल सिंह, सतनाम सिंह डडहेड़ी, सोनी जलालपुर, प्रीतम सिंह बडाली, चरणजीत कुमार, करण डडहेड़ी, प्रीतम सिंह मंडी, बाबा कुलदीप सिंह भगवानपुरा, बलवीर सिंह जल्लोवाल, कुलविंदर सिंह रैहिल, करमजीत सिंह मिट्ठू और मोहन सिंह धर्मगढ़ समेत बड़ी संख्या में संगत हाजिर थी।








